प्रेममूर्ति: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज न केवल एक महान संत थे, बल्कि ईश्वर प्रेम की साक्षात मूर्ति थे। उनका सम्पूर्ण जीवन राधा-कृष्ण के प्रेम में लीन रहा। वे कहते थे – “भगवान को पाने के लिए तर्क नहीं, हृदय की पुकार चाहिए।”
उनकी वाणी से निकले प्रत्येक शब्द में इतना माधुर्य और भाव होता था कि श्रोता स्वतः ही भक्ति में डूब जाते। उनके भजन, कीर्तन और प्रवचन आत्मा को झकझोर देने वाले होते थे। कृपालु जी महाराज ने भक्ति को न कोई सीमा दी, न कोई शर्त – उन्होंने सिखाया कि भगवान केवल निश्छल प्रेम से ही मिलते हैं।
उन्होंने नारी शिक्षा, गरीबों की सेवा और समाज में आध्यात्मिक जागरूकता लाकर भक्तिमय जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया। आज भी उनके विचार, भजन और सेवा संस्थान लोगों को ईश्वर की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
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